मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024

धोखा

इतना आजमाया हमारे स्वाभिमान को ,
की टूट कर चूर चूर हो गया ,
हसने लगे वो , कुटिल हसी ,
जिन्हे कभी जिंदा  बचाया हमने 


धोखा

इतना आजमाया हमारे स्वाभिमान को , की टूट कर चूर चूर हो गया , हसने लगे वो , कुटिल हसी , जिन्हे कभी जिंदा  बचाया हमने